HAPPY DIWALI ESSAY IN HINDI 2016

By | October 15, 2015

HAPPY DIWALI ESSAY IN HINDI

ESSAY ON DIWALI IN HINDI

happy diwali

दीपावली या दीवाली रोशनी का त्योहार है
दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति।
दीपावली दीपों का त्योहार है।
इसे दीवाली या दीपावली भी कहते हैं।
इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं।
दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे।
श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीए जलाए थे।
तब से आज तक प्रति वर्ष यह पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं।
यह पर्व अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है।
दीवाली अँधेरे से रोशनी में जाने का प्रतीक है।
कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती है।
दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाज़ार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नज़र आते हैं।
दीवाली भारत में एक सरकारी छुट्टी है
दिवाली भारत के आलावा नेपाल , श्रीलंका , म्यांमार , मारीशस , गुयाना , त्रिनिदाद और टोबैगो , सूरीनाम , मलेशिया , सिंगापुर और फिजी में भी मनाया जाता है .
हिंदुओं के लिए दीवाली एक महत्वपूर्ण त्यौहार है

HAPPY DIWALI ESSAY IN HINDI…

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दीपावली दो शब्दो से मिलकर बना हैं दीप +आवली. इसका अर्थ है, दीपो की पंक्ति अथवा कतार ।दीपावली कार्तिक माह की अमावस को मनाई जाती है। दीपावली के दिन सर्वत्र दीप जलाए जाते हैं ।धनतेरस,नरकचतुर्दशी,लक्ष्मीपूजन और बलिप्रतिपदा ये चार दिन दीपावली मनाई जाती है.चौदह वर्ष का बनवास समाप्त कर जब श्रीरामप्रभु अयोध्या लौटे तो उनकी खुशी में दीवाली मनाई जाती हैं.दीपावली के दिन प्रत्येक घर दीपों की पंक्तियों से शोभायमान रहता है। दीपों, मोमबत्तियों और बिजली की रोशनी से घर का कोना-कोना प्रकाशित हो उठता है। इसलिए दीपावली को रोशनी का पर्व भी कहा जाता है।

यह त्योहार अपने साथ ढेरों खुशियां लेकर आता है। एक-दो हफ्ते पूर्व से ही लोग घर, आंगन, मोहल्ले और खलिहान को दुरुस्त करने लगते हैं।दीपावली का दिन आने पर घर में खुशी की लहर दौड़ जाती है। बाजार में मिट्‍टी के दीपों, खिलौनों, खील-बताशों और मिठाई की दुकानों पर भीड़ होती है। दुकानदार, व्यापारी अपने बहीखातों की पूजा करते हैं और कई इसी दिन नए ‍वित्तीय वर्ष की शुरुआत भी करते हैं।

दीपावली के दिन भारत में विभिन्न स्थानों पर मेले लगते हैं। दीपावली एक दिन का पर्व नहीं अपितु पर्वों का समूह है। दशहरे के पश्चात ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती है। लोग नए-नए वस्त्र सिलवाते हैं। दीपावली के दिन चारो तरफ रोशनी और उजाले का वातावरण होता हैं.दीपावली से दो दिन पूर्व धनतेरस का त्योहार आता है। इस बाजारों में चारों तरफ चहल-पहल दिखाई पड़ती है।

बर्तनों की दुकानों पर विशेष साजसज्जा व भीड़ दिखाई देती है। धनतेरस के दिन बरतन खरीदना शुभ माना जाता है अतैव प्रत्येक परिवार अपनी-अपनी आवश्यकता अनुसार कुछ न कुछ खरीदारी करता है। इस दिन तुलसी या घर के द्वार पर एक दीपक जलाया जाता है। इससे अगले दिन नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली होती है। इस दिन यम पूजा हेतु दीपक जलाए जाते हैं।

संध्या में  लोग माँ लक्ष्मी की पूजा करते हैं. लोग इस दिन घर में नये नये पकवान बनाते हैं. बच्चे नये नये कपड़े पहनते हैं. पूजा के बाद लोग पटाखे फोड़ते हैं. लाखों लोग आतिशबाज़ी को देखने के लिए इकट्ठा होते हैं.दीवाली भारत के अधिकांश में फसल के मौसम के अंत का प्रतीक है.किसान इस वर्ष से चला गया वर्ष के इनाम के लिए धन्यवाद, और आगामी वर्ष के लिए एक अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करते हैं.

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